धोरीमन्ना निकटवर्ती श्री गौमाता गौशाला में बुधवार को विशाल शोभायात्रा के साथ श्री धेनु मानस गौ कथा एवं ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ हुआ प्रथम दिवस की कथा में कथा वाचिका डॉ मधु बिश्नोई ने कहा कि हमारी संस्कृति में गौ माता को सर्वोच्च स्थान रहा हैं हमारी परंपरा में गौमाता के महत्व के विषय में निरंतर ज्ञान बरसता रहा। हमारी संस्कृति और परंपरा इतनी महान है कि हम प्रतिष्ठा दे देकर एक पत्थर और एक प्रतिमा को भी भगवान बना देते हैं। तब गौमाता तो चलता फिरता देवालय है, विश्व की मां है। हमारे वेद, पुराणों एवं ग्रंथों ने, हमारे पूर्वजों ने, हमारे बड़ों ने, गाय को माता के रूप में स्वीकार किया है। पुराने जमाने में हमारी दादी, नानी, घर की माताएं सबसे पहले सुबह उठकर गाय की पीठ पर हाथ फेरा करती थी। इस हाथ फेरने का मतलब कि हमने सुबह-सुबह सूर्यनारायण प्रभु से हाथ मिला लिया। हमें गौ माता को सम्मान देना चाहिए। यदि हम गौ माता को सम्मान देते हैं तो हमारा जीवन सुधर जाएगा। गौमाता को सम्मान देकर हम अपना जीवन सुधार सकते हैं। हमारे हाथ जगन्नाथ प्रभु के हाथ हैं। इन्हें हम रोज गौ माता की सेवा में जीवन के सारे कष्टों को दूर करें। कथा के दौरान गौ कीर्तन, गौ महिमा के भजनों की प्रस्तुतियां दी गईविशाल शोभायात्रा के साथ हुआ आगाजकथा से पूर्व वाहनों में सवार होकर गौभक्तों की विशाल शोभायात्रा श्री गौमाता गौशाला गडरा से लेकर नेड़ीनाडी, धोरीमन्ना मुख्य बाजार, चार रास्ता, सोनी बाजार, आलमजी मन्दिर, जम्भेश्वर मंदिर, जाणीयो का मगरा से गडरा खिचड़ान होते हुए वापिस गौशाला परिसर स्थित कथा पांडाल पहुंची



