जालोर जिले के बागोड़ा क्षेत्र का गावड़ी गांव रविवार को उस समय सुर्खियों में आ गया, जब एएनटीएफ चौकी ने एक ही दिन में मेथामफेटामिन (एमडी) बनाने वाली दो अवैध फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ कर दिया। यह कार्रवाई न केवल तस्करों के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार मानी जा रही है, बल्कि बदलते नशा कारोबार की तस्वीर भी सामने ला रही है।
पहली रेड: आधुनिक सेटअप का खुलासा
सूचना के आधार पर एएनटीएफ टीम ने गावड़ी में दबिश दी। यहां एक मकान में आधुनिक उपकरणों, केमिकल और एमडी निर्माण में काम आने वाले सामान के साथ पूरी तरह तैयार सेटअप मिला। टीम ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और भारी मात्रा में सामग्री जब्त की। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि फैक्ट्री संगठित तरीके से संचालित की जा रही थी।
दूसरी फैक्ट्री: खेत में छिपा दिया सबूत
पहली कार्रवाई की भनक लगते ही दूसरी फैक्ट्री संचालक ने हड़बड़ी में पूरा सेटअप हटाकर खेत में फसल के बीच छिपा दिया और फरार हो गया। एएनटीएफ ने पहले संदिग्ध ठिकाने पर दबिश दी, लेकिन वहां कुछ हाथ नहीं लगा। टीम ने हार नहीं मानी और आसपास के खेतों में सघन तलाशी अभियान चलाया। आखिरकार फसल के बीच छिपाए गए केमिकल और उपकरण बरामद कर लिए गए। मौके से करीब 20 किलो एमडी बनाने योग्य केमिकल और अन्य सामान जब्त किया गया।
इस मामले में गावड़ी निवासी अचलाराम पुत्र आसूराम देवासी फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है।
कबाड़ी से मिला सुराग, बदली लोकेशन से खुला राज
जांच में सामने आया कि पकड़ी गई फैक्ट्री हाल ही में अपनी लोकेशन बदलने की तैयारी में थी। एएनटीएफ को पिछले 15 दिनों से बागोड़ा क्षेत्र में एमडी निर्माण की सूचना मिल रही थी, लेकिन सटीक ठिकाना नहीं मिल पा रहा था।
कबाड़ियों से पूछताछ के दौरान एक अहम सुराग मिला—एक व्यक्ति खाली ड्रम मुफ्त में दे रहा था। इसी जानकारी ने जांच की दिशा बदल दी। पता चला कि संचालक ओमप्रकाश ने पुरानी जगह खाली कर सहयोगी दीपाराम के कृषि कुएं पर नया सेटअप तैयार किया था। उत्पादन शुरू होने से पहले ही टीम ने कार्रवाई कर दी।
डोडा से एमडी तक: बदलता नशा कारोबार
पिछले छह माह में एएनटीएफ ने जालोर, बाड़मेर, जोधपुर और सिरोही जिलों में 12 अवैध एमडी फैक्ट्रियां पकड़ी हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकांश आरोपी पहले डोडा चूरा तस्करी से जुड़े थे।
डोडा तस्करी में बढ़ते जोखिम और सीमित मुनाफे के कारण तस्कर अब एमडी निर्माण की ओर रुख कर रहे हैं। कम लागत में फैक्ट्री स्थापित होना, छोटे पैकेटों में सप्लाई की सुविधा और 5 से 10 गुना तक मुनाफा—इन कारणों ने इस अवैध धंधे को तेजी से फैलाया है। मारवाड़ सहित गुजरात और अन्य राज्यों तक इसकी सप्लाई की जा रही थी।
फिलहाल एएनटीएफ फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। बागोड़ा की यह कार्रवाई साफ संकेत है कि नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने की मुहिम अब और तेज होने वाली है।



