
बीकानेर जिले के खाजूवाला सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय भारत-पाक सीमा पर एक बार फिर संदिग्ध गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। सीमा से सटे केएनडी क्षेत्र के पास वन विभाग की रोही में करोड़ों रुपये की हेरोइन बरामद होने से सीमापार तस्करी नेटवर्क की सक्रियता उजागर हुई है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार दो पीले रंग के पैकेटों में करीब एक किलो हेरोइन मिली है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 5 से 7 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

सर्च ऑपरेशन के दौरान मिली खेप
सीमा पर सतर्कता के तहत Border Security Force की 140वीं वाहिनी और स्थानीय पुलिस द्वारा संयुक्त सर्च अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान केएनडी के पास 5 बीडी की रोही में संदिग्ध पैकेट दिखाई दिए। तलाशी लेने पर इनमें हेरोइन पाई गई। बताया जा रहा है कि यह इलाका प्रशासनिक रूप से श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र में आता है।
मौके पर रावला थाना प्रभारी बलवंत कुमार, खाजूवाला सीओ अमरजीत चावला और प्रशिक्षु आरपीएस रोहित चौधरी सहित अन्य अधिकारी पहुंचे और सीजर की कार्रवाई शुरू की। सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त तलाशी भी शुरू कर दी है।

दो दिन पहले भी मिला था ड्रोन और हथियार
उल्लेखनीय है कि दो दिन पूर्व इसी सीमा क्षेत्र में ड्रोन और हथियार मिलने की घटना सामने आई थी। लगातार मिल रही ऐसी बरामदगियों से यह आशंका मजबूत हो रही है कि पाकिस्तानी तस्कर ड्रोन के जरिए नशे और हथियारों की सप्लाई की कोशिश कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय साजिश की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी केवल आपराधिक गतिविधि नहीं, बल्कि संगठित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है। ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से तस्करों को सीमा पार माल गिराने में आसानी हो रही है। यह बरामदगी न केवल राजस्थान बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी गंभीर मानी जा रही है।

जांच एजेंसियां अलर्ट
हेरोइन की खेप कहां से आई, किसके लिए भेजी गई थी और स्थानीय स्तर पर कौन इसका रिसीवर था—इन सभी पहलुओं पर जांच तेज कर दी गई है। केंद्रीय एजेंसियों को भी अलर्ट किया गया है। सीमा क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।
लगातार हो रही ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि भारत-पाक सीमा पर नशा तस्करी की चुनौती अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुकी है। सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता से एक बार फिर बड़ी खेप पकड़ी गई है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक पड़ोसी देश से ऐसी नापाक हरकतें जारी रहेंगी।



