बाड़मेर. अगर मन में कुछ करने का जज्बा और जुनून हो तो असफलता भी एक दिन आकर कदम चूमेगी। लेकिन उसमें भी अगर देशभक्ति का जज्बा हो तो मेहनत कभी बेकार नहीं जाती ऐसा ही कर दिखाया है बाड़मेर के एक युवा ने मां ग्रहणी और पिता टैक्सी चला कर परिवार चलाते हैं। आज हम बात बाड़मेर के रहने वाले हरिश डगाल की कर रहे हैं हरिश के मन में बचपन से ही देश सेवा का जज्बा था 6 भाई-बहन के परिवार में हरीश भारतीय सेना में जाकर देश की सेवा करने की इच्छा थी कॉलेज के पहले साल में ही एनसीसी का हिस्सा बन गया और 3 साल में यह प्रण प्रतिज्ञा बन गया। शुरुआती एक दो असफलताओं से उसने हार नही मानी और आख़िरकार 28 अक्टूबर 2023 को सीमा सुरक्षा बल की भर्ती में सफल हुआ है। हरीश कुमार डगला सीमा सुरक्षा बल की अपनी 7 महीने की ट्रेनिग महाराष्ट्र में करके वापस घर लौटा तो पूरा मोहल्ला उसके स्वागत के लिए उमड़ पड़ा. ढोल नगाड़ों के साथ लोगो ने उसे फूल मालाओं से लाद दिया।घर पर मां की गोद मे जितना जो सुकून होता है, वैसा दुनिया भर में कही नही होता है. एक टैक्सी चालक का बेटा फौजी बनकर जब घर लौटा तो उसके घरवालों ने भव्य स्वागत किया है. मां ने फौजी बेटे के सिर पर जब आशीर्वाद का हाथ रखा तो फौजी बेटे की आंखे भर आईं है खुशी में पटाखे फोड़े गए और केक भी कटा. पिता मानाराम के लिए आज का दिन सबसे गौरव का दिन रहा कि बेटा फ़ौज की वर्दी पहने हुए पहली बार घर लौटा है। टैक्सी चालक पिता मानाराम सजल आंखों से बोले कि आज का दिन बेहद गौरव का दिन है. अमूमन उनके आदिवासी समुदाय के लोग मजदूरी करते है लेकिन उनके बेटे के भारतीय सेना में जाने का सपना था. जोकि उसने अपनी मेहनत से पूरा किया है. सीमा सुरक्षा बल के आरक्षी हरीश कुमार बताते है कि मां सोमती देवी पढ़ी लिखी नहीं है लेकिन हमेशा देश सेवा की सीख देती रहती है. वह बताता है कि कॉलेज में कैप्टन आदर्श किशोर जाणी का मोटिवेशनल काफी काम आया. वह बताते है कि किसी भी शुरुआती असफलता से कभी रुकना नहीं चाहिए. यही वजह है कि उसने कभी हिम्मत नही हारी और आज सीमा सुरक्षा बल की वर्दी में घर पहुंचा है. वह कहते है कि लगातार मिल रही असफ़लताओ के बावजूद मन मे सेना में जाने का सपना पाल रखा था।



