
पिता जेल में, फिर भी नहीं टूटा हौसला… परावा गांव में जश्न का माहौल
चितलवाना। कहते हैं कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता रास्ता खुद बना लेती है। इस कहावत को सच कर दिखाया है परावा गांव की होनहार छात्रा चंद्रिका गोपालजी बिश्नोई सारण ने, जिसने राजस्थान बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 99 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जालोर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया है।
चंद्रिका की यह सफलता इसलिए और भी खास बन जाती है क्योंकि उनके पिता इस समय पेपर लीक मामले में जेल में हैं। ऐसे कठिन पारिवारिक दौर में भी चंद्रिका ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकने दिया और विपरीत परिस्थितियों को अपनी ताकत बना लिया।
सिवाड़ा स्थित सनराइज पब्लिक स्कूल के प्रधानाध्यापक राम निवास मुढ़ ने बताया कि चंद्रिका ने 8वीं कक्षा में विद्यालय में प्रवेश लिया था और तब से लगातार प्रथम स्थान प्राप्त करती आ रही है। उन्होंने कहा कि चंद्रिका शुरू से ही अनुशासित, मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित छात्रा रही है। परिस्थितियां चाहे जैसी भी रही हों, उसने कभी पढ़ाई से समझौता नहीं किया।
चंद्रिका का परिवार शिक्षा से जुड़ा रहा है। उनके दादा पाबूराम सारण सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हैं, जिनसे उसे हमेशा मार्गदर्शन मिलता रहा। उनकी माता इंदुबाला ने भी कठिन समय में बेटी का हौसला बनाए रखा। परिवार में एक बहन और छोटा भाई रविंद्र है, जो वर्तमान में 8वीं कक्षा में अध्ययनरत है।
चंद्रिका रोजाना परावा गांव से स्कूल बस के माध्यम से सिवाड़ा जाकर पढ़ाई करती थी और घर लौटकर नियमित स्वाध्याय करती थी। विपरीत हालातों के बावजूद उसकी लगन, मेहनत और आत्मविश्वास ने उसे यह मुकाम दिलाया है।
विशेष बात यह भी है कि चंद्रिका ने एक वर्ष पहले “छू ले अब वो नभ, नभ दूर नहीं” नामक पुस्तक भी लिखी थी, जो उसके सपनों और संघर्ष की कहानी बयां करती है।
चंद्रिका की इस उपलब्धि पर गांववासियों, विद्यालय स्टाफ और क्षेत्र के लोगों ने गर्व व्यक्त किया है। परावा गांव में जश्न का माहौल है और हर कोई इस होनहार बेटी के जज्बे और सफलता को सलाम कर रहा है।
यह कहानी सिर्फ टॉप करने की नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी हिम्मत और हौसले से आगे बढ़ने की मिसाल है।



